सदी का सबसे बड़ा चंद्रग्रहण 27 जुलाई की रात को, इस दौरान भूलकर भी न करें ये काम

27 जुलाई को एक सदी का सबसे लंबा और पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने वाला है। साल का दूसरा खग्रास चंद्रग्रहण अषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर 27 जुलाई को पड़ेगा। इसमें चांद 52 मिनट तक तांबे के रंग जैसा नारंगी या गहरा लाल रंग का दिखाई देगा। ग्रहण पर कुछ योग ऐसे हैं, जो करीब 104 वर्षों बाद बन रहे हैं। स्पर्श से लेकर मोक्षकाल तक इसका समय 3 घंटे 54 मिनट 33 सेकेंड का रहेगा। इसे सदी का सबसे बड़ा चंद्रग्रहण माना जा रहा है।

चंद्रग्रहण तिथि: 27 जुलाई
ग्रहण प्रारंभ : रात 11:54 बजे
ग्रहण समाप्ति : रात 3:49 बजे
सूतक प्रारंभ : दोपहर 2:54 बजे

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रात 11:54 बजे शुरू होगा चंद्र ग्रहण 
ज्योतिषाचार्य उमेश शर्मा के अनुसार चंद्र ग्रहण 27 जुलाई को रात 11:54 बजे शुरू होगा जो 2:43 बजे तक रहेगा। रात 1:52 बजे इसका रूप अत्यंत गहरा हो जाएगा और समाप्ति 3:49 बजे होगी। यानी चंद्रग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 55 मिनट रहेगी।

राशियों पर पड़ेगा प्रभाव
ज्योतिषाचार्य नित्यनाथ पांडेय के अनुसार चंद्रग्रहण का मेष, सिंह, वृश्चिक व मीन राशि के जातकों के लिए शुभ और बाकी राशियों के लिए अशुभ है।

अंडाकार साइज में रहेगा चंद्रमा
जवाहर तारामंडल के निदेशक रवि किरन ने बताया जुलाई में पृथ्वी से सूर्य की दूरी अधिक रहती है, इसलिए पृथ्वी से उसका साइज छोटा दिखाई देता है। साथ ही चंद्रमा के अंडाकार रूप होने के कारण चंद्रग्रहण की अवधि इस बार अधिक रहेगी।

तारामंडल में लगेगी दूरबीन
निदेशक के अनुसार चंद्रग्रहण को देखने के लिए जवाहर तारामंडल परिसर में दो दूरबीन लगाई जाएंगी। 27 जुलाई को कोई भी व्यक्ति इस अद्भुत नजारे को नि:शुल्क देख सकता है।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रभात मिश्र व पं. योगेंद्र शास्त्री के अनुसार पूर्णिमा पर 27-28 जुलाई की मध्य रात्रि को पड़ने वाला खग्रास चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ा-श्रवण नक्षत्र और मकर राशि पर पड़ रहा है। इसका असर शनि की राशियों पर विशेष रूप से पड़ेगा।

गुरु पूर्णिमा की रात 11:54 बजे शुरू होगा चंद्रग्रहण, इन राशिवालों के लिए शुभ

यह खग्रास चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत के साथ विभिन्न देशों में भी दिखाई देगा। ग्रहण मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए शुभ तथा वृष, कर्क, कन्या व धनु राशि के जातकों के लिए मिश्रित फलकारी रहेगा। मिथुन, तुला, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह अशुभ रहेगा। आचार्य पं. शंकर ओझा के अनुसार चंद्रग्रहण के दिन विभिन्न अशुभ योगों के कारण प्राकृतिक आपदा से नुकसान भी संभव है।

गोचर में मकर राशि के केतु के साथ चंद्रमा का प्रभाव और राहु से उसका समसप्तक दृष्टि संबंध होना भी ठीक नहीं है। वेदाचार्य पं. दिलीप मिश्र के अनुसार यह ग्रहण शनि प्रभावित चार राशियों के लिए अशुभ रहेगा।

इस बार 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर दुर्लभ खगोलीय नजारा दिखाई देगा। क्योंकि इस दिन इस  सदी की सबसे लंबी अवधि का चंद्र ग्रहण लगेगा। वैज्ञानिक दृष्टि से इस ‘रेड मून’ को खुली आंख से भी देखा जा सकता है। यह पूरी तरह से लाल रंग में रहेगा और संपूर्ण भारत में दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण पर दोपहर 2:54 बजे से सूतक लग जाएगा। इसलिए गुरु पूर्णिमा का पूजन सूतक से पहले करना फलदायी रहेगा।

साल का दूसरा खग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है। यह चंद्र ग्रहण सुपर ब्लू ब्लड मून होगा। इस चांद को देखने के लिए सभी उत्साहित होंगे। कहा जाता है कि ग्रहण देखने से आंखों की रोशनी पर फर्क पड़ता है। आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण के दौरान सोलर रेडिएशन से आंखों के नाजुक टिशू डैमेज हो जाते है, जिस वजह से आखों में देखने में दिक्कत हो सकती है। इसे रेटिनल सनबर्न भी कहते हैं। ये परेशानी कुछ वक्त या फिर हमेशा के लिए भी हो सकती है लेकिन चंद्र ग्रहण के दौरान ऐसा नहीं होता। इस दिन चांद को नंगी आंखों से देखने से कोई नुकसान नहीं होता।

1.  सूर्य ग्रहण की तरह आपको इसे चश्मों के साथ देखने की ज़रूरत नहीं. बल्कि आप चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देख सकते हैं. वहीं, सूर्य ग्रहण को खास सोलर फिल्टर वाले चश्मों से देखने की सलाह दी जाती है जिन्हें सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या आइक्लिप्स ग्लासेस कहा जाता है।

2. आप चाहे तो खुले मैदान या फिर पास के किसी पार्क या घर की छत पर ही जाकर चांद का दीदार कर सकते हैं।

3. सिर्फ चश्मे ही नहीं इस ग्रहण को देखने के लिए आपको किसी भी तरह से खास आंखों को प्रोटेक्ट करने वाले साधन की ज़रूरत नहीं।

इस चंद्र ग्रहण की अवधि 1 घंटे और 43 मिनट की होगी। ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा के साथ राहू की युक्ति हो रही हो तो ऐसी अवस्था को चंद्र दोष माना जाता है। इसी अवस्था को चंद्र ग्रहण भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस अवस्था में चंद्रमा पीड़ित होता है और चंद्रमा चूंकि मन का कारक है इसलिये मन में भी विकार पैदा होने लगते हैं। इसके अलावा भी कुछ और अवस्थाएं हैं जिनमें चंद्र दोष होता है। जब चंद्रमा पर राहू की दृष्टि पड़ रही हो तो यह भी चंद्र दोष कहलाता है या फिर चंद्रमा केतु के साथ युक्ति संबंध कर रहा हो तो उसे भी चंद्र दोष माना जाता है। चंद्रमा यदि नीच राशि का हो या फिर नीच ग्रह, अशुभ ग्रह या कहें पाप ग्रहों के साथ हो तो भी चंद्र दोष होता है।

चंद्र दोष से बचने के उपाय

चंद्र दोष से जाने अंजाने में कोई न कोई पीड़ित हो जाता है, और पीड़ित होने के बाद से ही जातक के जीवन में उथल-पुथल मचने लगती है। वह आशंकित रहने लगता है, भयभीत हो जाता है, लगातार हो रही हानियों से तनावग्रस्त हो जाता है यहां तक पारिवारिक जीवन भी असंतोष से भरने लगता है। कई बार तो जीवन साथी के साथ मतभेद इतने बढ़ जाते हैं कि अलगाव की स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिए चंद्र दोष से बचाव के उपाय जरुर करने चाहिए।

चंद्र दोष से बचाव के लिए पीड़ित को चंद्रमा के अधिदेवता भगवान शिवशंकर की पूजा करनी चाहिए साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप एवं शिव कवच का पाठ भी चंद्र दोष को कम करने में सहायक होता है।

इनके अलावा चंद्रमा का प्रत्याधिदेवता जल को माना गया है और जल तत्व के स्वामी भगवान गणेश हैं इसलिए गणेशोपासना से भी चंद्र दोष दूर होता है विशेषकर तब जब चंद्रमा के साथ केतु युक्ति कर रहा हो।

इनके अलावा दुर्गासप्तशती का पाठ, गौरी, काली, ललिता और भैरव की उपासना से भी राहत मिलती है।

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य व सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

शास्त्रों में चंद्रग्रहण के दौरान कुछ कामों को करने में दोष माना जाता है। हम आपको ऐसे ही कुछ कामों के बारे में बताने जा रहे हैं।

-चंद्रग्रहण के समय ऐसी महिलाएं घर से बाहर न निकलें, खसकर करके गर्भवती महिलाएं हों।

-इसके अलावा सुईं व नुकीली चीजों का उपयोग करने से  भी बचना चाहिए।

-मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण के दौरान लोगों को कुछ भी नहीं खाना चाहिए। अगर कुछ खाने का मन है, तो चंद्रग्रहण शुरू होने से पहले या फिर खत्म होने के बाद खा लें।

-चंद्रग्रहण के समय लोगों को कोई भी शुभ काम नहीं करने चाहिए।

– समय तक चंद्रग्रहण रहता है, उस वक्त तक भगवान की पूजा अर्चना न करें।

-चंद्रग्रहण के दौरान भगवान के मंदिर के दरवाजों को भी बंद रखना शुभ माना जाता है।

चन्द्र ग्रहण 2018: कुंवारी कन्याएं न देखें ग्रहण का चांद, ग्रहण खत्म होने पर जरूर करें ये काम

ज्योतिषियों के अनुसार कुवांरी कन्याओं को ग्रहण के दौरान और ग्रहण के बाद चांद नहीं देखना चाहिए।  ऐसा करने से उनके विवाह में रुकावटें आ सकती हैं। इसके अलावा ग्रहण खत्म होने के बाद पूरे घर को धोकर स्नानकर मंदिर की साफ-साफाई करनी चाहिए। इसके बाद गरीबों को अपनी राशि के अनुसार अनाज, कपड़े या अन्य चीजों का दान करना चाहिए।

 

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