लखनऊ खास: लखनऊ वाले दुनिया के किसी भी कोने में हों ये १० बातें बता देंगी की वो लखनवी है

लखनऊ का रहन-सहन और नवाबी तो पूरी दुनिया जानती है,वैसे तो यहाँ के लोग पूरी दुनिया में ख़ुशबू की तरह फैले हुए हैं लेकिन ख़ुशबू फ़ैलाने की जगह रायता फ़ैलाने में सबसे आगे हैं। अब हमने तो यहाँ का नमक और क़बाब दोनों खाया है इसलिए हम आपको यहाँ की कुछ अच्छी बातें ही बताऊंगा, बुरी बातें तो हम अकेले मिलने पर बताते हैं।

अच्छा एक बात और हम जो हैं वो ‘मैं’ से ज्यादा ‘हम’ बोलने में विश्वास करते हैं, क्यों की हमें ‘मैं’ शब्द में अहम का भाव नजर आता है।

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एक सर्वे में पता चला की लखनऊ भारत का दूसरा सबसे ख़ुश शहर है, हो भी क्यों ना, लखनऊ वालों को तो बेवजह ख़ुश रहने की आदत जो है, एक लखनऊ वाले को मुंबई में गेट वे ऑफ़ इंडिया या आगरा का ताजमहल देखकर उतनी खुशी नहीं होगी, जितनी मुंबई या दिल्ली में UP-32 की गाड़ी देख कर होती है।

तो चलिए अब हम आपको बताते है की कैसे आप एक लखनऊ वाले को दुनिया की भीड़ में पहचान सकते हैं !!

1. मटर वाले गोलगप्पे: मटर वाले पानी के बताशे (गोलगप्पे) की दुकान पर अगर कोई आलू या छोले की जगह सफ़ेद मटर और चार-पांच तरह के पानी की बात या ज़िक्र करे तो समझ सकते हैं वो लखनऊ का है।

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2. खुशमिजाज़ व खुशनुमा: ख़ुशमिजाज़ी व खुशनुमा तो हम लखनऊ वालों के खून में है। “मुस्कुराइये जनाब आप लखनऊ में हैं” ये लाइन तो आपने कहीं न कहीं सुनी ही होगी, क्यों की हम बेवजह ख़ुश रहना जानते हैं।

3. कबाब, चाट और खस्ते-कचौड़ी: कहीं भी आप खाने की ज़्यादा तारीफ़ सुने, जिसमे खास कर कबाब, चाट और खस्ते कचौड़ी की तारीफ़ हो रही हो तो आप समझ जाईये बंदा ये बिंदास है, लखनऊ सिटी का तो खास है। वैसे लखनऊ में किसी चीज की कमी थोड़ी है पर ये लखनऊ वाले दूसरे शहर जाते ही इसलिए हैं ताकि अपने शहर के खाने की तारीफ़ कर सकें।

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4. मैं नहीं हम बोलना: जहाँ कहीं भीड़ में मैं की जगह हम शब्द सुनाई दे समझ जाओ अगले के तार का कनेक्शन लखनऊ से जुड़ा है, हम जो हैं वो ‘मैं’ से ज्यादा ‘हम’ बोलने में विश्वास करते हैं, क्यों की हमें ‘मैं’ शब्द में अहम का भाव नजर आता है।

5. दही जलेबी का नाश्ता: अगर आपने दही जलेगी का नाश्ता नहीं किया तो आपने जिंदगी नहीं जिया, ऐसे हांकते हैं हम लखनऊ वाले। कहीं किसी शहर के तिराहे या चौराहे पर अगर कोई हलवाई से दही और जलेबी ख़रीद कर खाता दिखे तो समझ जाईये जनाब लखनवी है। जी हाँ जनाब, लखनऊ वाले दही-जलेबी बड़े चाव से खाते हैं।

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6. लखनवी शब्दकोष: बहुत से शब्द लखनऊ में ऐसे इजात किये गए हैं जो केवल आपको लखनऊ वालों के मुंह से ही सुनाई देंगे। “तोह फिर जनाब ज़रा गौर फरमायें” लखनऊ में लोग मारते नहीं हौंकते या पेलते हैं, यहाँ लड़ाई में काटते नहीं सीधे फाड़ देते हैं। यहां बच्चों की यहां कुटाई होती है और लवंडो का भौकाल टाइट रहता है। यहां झगड़ा नहीं, मैटर होता है और जो इनसे कायदे में रहता है, वही फ़ायदे में रहता है। तो इसलिए ये गंगा-जमुनी तहज़ीब लखनऊ को दूसरे शहरों से बहुत ही अलग और खास बना देती हैं।

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7. सिटी मोंटेसरी स्कूल कनेक्शन: लखनऊ का लगभग हर पांचवा या छठा इंसान आपको सिटी मोंटेसरी स्कूल का पढ़ा हुआ मिलेगा, इसके अलावा ज़्यादातर लखनऊ वाले किसी न किसी सिटी मोंटेसरी स्कूल की ब्रांच के आस-पास ही रहते हैं. जनाब, आपको हर दो किलोमीटर में सिटी मोंटेसरी स्कूल की एक ना एक ब्रांच आपको मिल ही जाएगी।

8. चिकन खाना भी और पहनना भी: लखनऊ वाले चिकन खाते ही नहीं पहनते भी हैं, लखनऊ का नॉनवेज तो पूरी दुनिया में मशहूर है। इसी के साथ मशहूर है चिकन खाने और पहनने वाला ये जोक “चिकन खाते ही नहीं, पहनते भी हैं” जो हर लखनऊ वाला ​कभी न कभी मार ही देगा। यहां चिकन के कपड़े बहुत ही अच्छे तरह से बुने जाते हैं जो यहां के किसी भी बाजार में आसानी से मिल जायेंगे और यहाँ की चिकन बिरयानी के बारे में तो आपने सुनी ही होगी। जिसका तो कोई जबाब ही नहीं है।

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9. लखनऊ से ज्यादा मज़ा नखलऊ में सुनने में: लखनऊ की जगह नखलऊ बोलने की संख्या में अभी तो कमी आ रही हैं वरना हर दसवें बन्दे की जुबान से नखलऊ ही निकलता था, वैसे लखनऊ वालों के कान तो अपने शहर का नाम सुनते ही खड़े हो जाते हैं. कभी आप लखनऊ के नवाब की ​एक्टिंग करने को को तो बोलिये इनसे, जनाब मुंह में पान रखने की एक्टिंग करते हुए कहेंगे, “अमां मियां हम तो नखलऊ से हैं पर आप की तारीफ नहीं सुनी हमने”

10. लखनऊ बहुत बड़ा शहर है: अगर आप चेक करना चाहते हैं की लखनऊ बड़ा शहर है या छोटा तो किसी लखनऊ वाले से बस इतना बोल दीजिये कि लखनऊ तो छोटा शहर है भाई साहब मीटर गेज लेकर आ जायेंगे लड़ने की चलो नाप देते हैं कितना बड़ा हैं लखनऊ। तो अब आपको पता चल ही गया होगा की लखनऊ को क्यों कहते हैं ऐसे सिटी ऑफ़ नवाब!!Adsasfd

Lucknow is called “City of Nawabs” because of its culture and history. As Lucknow was ruled by Nawabs for many years , the culture of Lucknow still have royalty “Adab”, “Tehzeeb” and “Nazakat” of Nawabs.

तो एक बार लखनऊ आना तो बनता है, जी आप भी कभी आईये हमारे नखलऊ शहर साथ में ऐश फ़रमाते हैं !!asdasffaतो फिर जनाब ज़रा गंगा-जमुनी तहज़ीब में कमेंट करके बताये की कैसा लगा हमारा ये पोस्ट आपको !!

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